भागलपुर, मार्च 27 -- झाझा, निज संवाददाता। शासन-प्रशासन के छोरों से रसोई गैस की आपूर्ति के सामान्य होने के दावे लगातार,या कहें कि लगभग हर दिन सुनने को मिलते आ रहे हैं। थोड़ी बहुत परेशानी की बात (जो कि वैश्विक संकट की मौजूदा स्थिति में शायद स्वाभाविक भी है) को छोड़ दें,तो घरेलू यानि डोमेस्टिक सिलेंडर के मामले में उक्त सरकारी दावे कुछ हद तक सही भी माने जा सकते हैं। किंतु,बात यदि वाणिज्यिक यानि कॉमर्शियल सिलेंडरों की की जाए तो यह अभी भी लोगों की पहुंच से बाहर बना हुआ है। इसका नसीब हो पाना मुश्किलों का सबब बना है। इसके नतीजे में इलाके की होटलों,रेस्टोरेंट आदि के रोजगार से लेकर रेलवे की रसोई तक भी मुश्किल में पड़ गई है। झाझा स्थित रेलवे मेमू कर शेड के बाहर रेलकर्मियों के नाश्ते-खाने की तलब पूरी करने के मक्सद से संचालित कैंटीन किस तरह चला रहे हैं क...