इंदौर, अप्रैल 11 -- सोशल मीडिया पर डाले गए स्टेटस को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल द्विअर्थी शायरी या सामान्य स्टेटस पोस्ट करना जमानत निरस्त करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। इसी के साथ कोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग खारिज कर दी। मामला देवास निवासी एक युवक से जुड़ा है, जिसके खिलाफ 25 वर्षीय युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने लंबे समय तक विवाह का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। यह भी पढ़ें- ग्वालियर में होमगार्ड जवान को ट्रक ने रौंदा, उड़नदस्ता की टीम में शामिल था मृतकबचाव पक्ष ने बताया आर्थिक विवाद आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत याचिका में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच पहले से आ...