रांची, फरवरी 3 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमित जमानत पाने के लिए आरोपी का हिरासत में होना या अदालत के समक्ष शारीरिक रूप से आत्मसमर्पण करना एक अनिवार्य शर्त है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी नवीन केडिया की जमानत याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब तक व्यक्ति हिरासत में नहीं है, तब तक सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत जमानत अर्जी पर विचार नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और अदालत के समक्ष उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की कोशिश की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहली बार पेशी के दौरान आरोपी की भौतिक उपस्थित...
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