रांची, जनवरी 11 -- साल 1993। देश में कांग्रेस की सरकार थी। इसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव कर रहे थे, लेकिन सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। सदन में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका था। मगर दिशोम गुरु 'शिबू सोरेन' के झारखंड मुक्ति मोर्चा के 4 सदस्यों ने सरकार के पक्ष में मतदान करके सरकार को गिरने से बचा लिया। लेकिन, ये मामला इधर ही नहीं थमा। समय का चक्का घूमा तो अदालती और कानूनी लड़ाई के बाद सामने आया कि अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट डालने के लिए JMM के सदस्यों ने रिश्वत ली थी। इसी मामले में इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री (नरसिम्हा राव) को जेल की सजा सुनाई गई। वहीं शिबू सोरेन को भी जेल की सजा सुनाई गई। हालांकि दोनों नेता बाद में बरी हो गए। आज शिबू सोरेन की जन्मजयंती पर पढ़िए उनके जीवन से जुड़ा खास किस्सा।राव सरका...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.