नई दिल्ली, जून 23 -- Aaj ka pravchan: उशीनर देश में ऋषि बालाकि रहते थे। उन्होंने वेद-वेदांग का गंभीर अध्ययन किया था। इससे उनका गर्व दिनोदिन बढ़ता जा रहा था। बालाकि घूमते हुए काशी के विद्वान राजा अजातशत्रु की सेवा में उपस्थित हुए। उन्होंने अजातशत्रु से कहा, 'राजन, मैं ब्रह्मज्ञान का उपदेश करने के उद्देश्य से आपके पास आया हूं।' अजातशत्रु ने कहा, 'आपका मुझ पर अनुग्रह है। मैं इसके लिए आपको एक हजार गायें भेंट के रूप में प्रदान कर रहा हूं।'ब्रह्म क्या है: राजन सुनिए, 'ब्रह्म क्या है, मैं आपको बता रहा हूं।' 'सूर्यमंडल में प्रकाश के रूप में जो तेज है, वही ब्रह्म है।' अजातशत्रु ने बालाकि की बात बीच में काटते हुए कहा, 'नहीं महाराज, आप उसके संबंध में मुझे कुछ न बताइए। मैं उसे अच्छी तरह जानता हूं।' कुछ देर के बाद बालाकि ने कहा, 'चंद्रमंडल में जो प्रक...