चेन्नई, मई 7 -- तमिलनाडु की सियासत में सिनेमाई पर्दे से निकलकर राजनीति के मैदान में उतरे तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री बनने की राह में राजभवन ने एक बड़ा 'स्पीड ब्रेकर' लगा दिया है। कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करने जब विजय राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने लोक भवन पहुंचे, तो उन्हें तुरंत शपथ दिलाने से साफ इनकार कर दिया गया। राजभवन की तरफ से एक सख्त शर्त रखी गई- पहले 118 विधायकों के समर्थन वाला पत्र लेकर आइए, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया होगी। इस घटना ने भारतीय राजनीति में एक बार फिर उस पुरानी और तीखी बहस को हवा दे दी है: क्या देश में राज्यपाल राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टियों के हिसाब से दोहरा रवैया अपनाते हैं? इस सवाल की गहराई नापने के लिए हमें 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के पन्नों...
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