लखनऊ, दिसम्बर 15 -- मेटाफर लिट्रेचर फेस्टिवल में हिन्दी मूर्धन्य साहित्यकार भगवती चरण वर्मा के जीवन के अनभिज्ञ पहलुओं पर चर्चा की गई। भगवती चरण वर्मा के पौत्र चन्द्र शेखर वर्मा ने उनके जीवन के ऐसे किस्से साझा किए जिनमें भगवती बाबू के निजी जीवन में आयी परेशानी और जीवन की रोचक घटनाओं का जिक्र हुआ। किस प्रकार भगवती बाबू के साथ एक प्रकाशक ने चालाकी करने की कोशिश कि तो कैसे अपनी वाकपटुता से उन्होंने मामले को अपनी तरफ कर लिया। चन्द्रशेखर ने बताया कि एक बार भगवती बाबू इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे, उनके पास अपनी फीस देने का संकट था। उस समय मालवीय प्रकाशन के मालवीय बाबू ने भगवती बाबू से कहा कि आप एक अंग्रेजी की पुस्तक का अनुवादित कर दीजिए। प्रत्येक पेज के चार पैसे मिलने थे। भगवती बाबू ने 80 पन्ने की पुस्तक को इसलिए अनुवादित कर दिया कि उन्...
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