नई दिल्ली, मार्च 11 -- जब प्यार किया तो डरना क्या.तेरी महफिल में किस्मत आजमा के.1950 और 60 के दशक में ऐसे कई गाने आए जिन्होंने उस समय के सिनेमा के नए सफर की शुरुआत की। ये गाने ही थे जिन्होंने फिल्मों और उस दौर के एक्टर्स को पहचान दी। इन गीतों को आवाज देने वाले और म्यूजिक से तैयार करने वाले कंपोजर के अलावा गीतकार की भी अहम भूमिका थी। उसी समय एक ऐसा गीतकार आया जिसने अपने लिखे गीतों, कव्वाली, शायरी, गजल के अलावा भजनों से भी अलग पहचान बनाई। एक मुस्लिम गीतकार जिसने जब भजन लिखे तो सारी धारणाओं को बदल दिया। ये वो गीतकार था जिसने हॉस्पिटल के बिस्तर पर लेटे हुए दिलीप कुमार की सफल फिल्म के गीत लिख दिए थे। इस गीतकार का नाम है शकील बदायुनी।शकील बदायुनी का जन्म और गीत 3 अगस्त 1916 को बदायूं जिले में जन्में गीतकार का असली नाम शकील अहम मसूदी था। मशहूर ह...
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