कानपुर, मई 20 -- महाराजपुर इलाके का वो गांव जहां चाचा-चाची ने मासूम भतीजों और भतीजी को क्रूर यातनाएं दीं। मां-बाप का साया उठने के बाद इनका उत्पीड़न करते रहे। नौकर बनाकर रखा। भोजन मांगने पर पीटा। चिमटे से पीठ और हाथ दाग दिया। अब ये बच्चे अपने पिता के बनाए कमरे में हैं। भले ही कमरे में तख्त नहीं है तो क्या हुआ? अब ये सुकून में हैं कि एफआईआर दर्ज होने के बाद इन्हें यातनाओं से मुक्ति मिल गई। मगर चिंता इस बात की भी है कि इस परिवार का सबसे बड़ा सदस्य भी सिर्फ 14 साल का है। दो भाई और एक बहन की सारी जिम्मेदारी इस नन्हें कंधे पर आ चुकी है। मगर क्या करे? पढ़ने को किताबें नहीं...पहनने को ड्रेस नहीं...जूते और चप्पल फट चुके...दो जून की रोटी की चिंता अलग से। गृहस्थी चलाएं या पढ़ाई करें? खुद पढ़ें या भाई-बहनों को पढ़ाएं? अब इन बच्चों को माता-पिता की बहु...