नई दिल्ली, सितम्बर 27 -- नई दिल्ली। स्वास्थ्य बीमा के मामलों में बड़ी संख्या में कंपनियां पॉलिसी से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन कर दावों को खारिज कर रही हैं। खासकर पॉलिसीधारकों को क्रॉनिक स्मोकर (लंबे समय से धूम्रपान का सेवन करने वाला) बताकर दावे खारिज किए जा रहे हैं। जबकि शिकायत के बाद जांच के दौरान बीमा कंपनियां यह साबित करने में असफल हो रही हैं कि पॉलिसीधारक लंबे समय से धूम्रपान का सेवन करता है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने स्पष्ट किया है कि बीमा कंपनियां केवल किसी आशंका या मौखिक जानकारी के आधार पर पॉलिसीधारक का दावा खारिज नहीं कर सकतीं। दावा खारिज करते समय बीमा कंपनी को स्पष्ट कारण बताना और संबंधित पॉलिसी की शर्त का उल्लेख करना जरूरी है। कंपनी को दावे के खारिज या अस्वीकार किए जाने के आधार से जुड़े दस्तावेज और तथ्य भी ...