लातेहार, अप्रैल 26 -- लातेहार, प्रतिनिधि। जहां चाह, वहां राह की कहावत लातेहार सदर प्रखंड के सीसी गांव निवासी दो सगे भाइयों सुदामा महतो और रामाशीष मेहता पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद दोनों भाइयों ने अपने अदम्य साहस और मेहनत के दम पर न सिर्फ आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी कायम की है। दोनों भाइयों के जीवन की शुरुआत चुनौतियों से भरी रही। जन्म से नेत्रहीन होने के कारण उनके पिता को उनके भविष्य की चिंता सताती रहती थी। ग्रामीण परिवेश में शिक्षा की सीमित सुविधाओं के कारण वे पढ़ाई से दूर रह गए। यह भी पढ़ें- जन्म से नेत्रहीन, पर हौसले बुलंद लातेहार के दो भाइयों ने खेती से रचा प्रेरणा का नया अध्याय लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खेती को अपना आधार बनाया और बचपन से ही अपने पिता के साथ खेतों में काम कर...