जन्म लेते ही क्यों रोते हैं नवजात शिशु? गरुड़ पुराण में बताया गया है खास कारण
नई दिल्ली, अगस्त 25 -- जब बच्चा जन्म लेता है, तो उसका रोना जीवन का पहला संकेत माना जाता है। लेकिन गरुड़ पुराण में इस रोने को सिर्फ एक शारीरिक घटना ना मानकर, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ा गया है। आत्मा पूर्व जन्मों की यादें लेकर आती है। नया शरीर ग्रहण करना उसके लिए आसान नहीं होता। जन्म के समय की चीख के पीछे गहरी मान्यता छिपी हुई है।गर्भ में आत्मा की जागरूकता गरुड़ पुराण के अनुसार, आत्मा पूर्ण रूप से सजग होती है। वह पूर्व जन्मों, सीखों और गलतियों को याद रखती है। गर्भ में रहते हुए आत्मा गहन चिंतन करती है, मानो नई शुरुआत की तैयारी कर रही हो। यह अवस्था आत्मा के लिए एकांत और चिंतन का समय होती है। नया जन्म लेने से पहले वह अपने पिछले अनुभवों को समेटती है। गर्भ का वातावरण आत्मा को सुरक्षित और शांत महसूस कराता है।जन्म का क्षण आत्मा के लिए कष्टकार...
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