जन्म के तुरंत बाद 10 फीसदी शिशुओं को सांस लेने में परेशानी
प्रयागराज, मई 31 -- इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, नेशनल आईएपी, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम और एमएलएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओर से रविवार को मेडिकल कॉलेज के सभागार में नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा से संबंधित एडवांस नियोनेटल रिससिटेशन प्रोवाइडर कार्यशाला हुई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एके वर्मा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीलम सिंह और बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव शरण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य प्रशिक्षक मेदांता अस्पताल लखनऊ के डॉ. आकाश पंडिता ने कहा कि शिशु के जन्म के बाद पहले गोल्डन मिनट में 100 में 10 बच्चों को सांस लेने में परेशानी होती है। 10 में से नौ बच्चे को कृत्रिम सांस देकर बचाया जा सकता है। वहीं, एक बच्चे को चेस्ट कंप्रेशन सीपीआर की जरूरत होती है। यूनाइटेड मेडिसिटी ...
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