नई दिल्ली, मार्च 16 -- वैदिक ज्योतिष में गुरु चांडाल योग एक ऐसा योग माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की बाधाएं और चुनौतियां लाता है। यह योग तब बनता है, जब गुरु ग्रह राहु या केतु के साथ युति, दृष्टि या संयोग में आता है। गुरु को ज्ञान, धर्म, नैतिकता और सकारात्मकता का कारक माना जाता है, जबकि राहु भ्रम, लालच और असंतुलन का प्रतीक है। इन दोनों का मिलन गुरु की शुभता को कमजोर कर देता है और व्यक्ति को गलत निर्णयों, संघर्षों और तरक्की में रुकावट की ओर ले जाता है। हालांकि, इसका प्रभाव कुंडली के अन्य योगों और ग्रहों पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं इसके लक्षण और उपाय।गुरु चांडाल योग कैसे बनता है? जब कुंडली में गुरु ग्रह राहु या केतु के साथ किसी भाव में बैठा हो या दोनों एक-दूसरे पर दृष्टि डाल रहे हों, तो गुरु चांडाल योग बनता है। विशेष रू...
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