वाराणसी, सितम्बर 3 -- वाराणसी। कभी इस्कॉन के लिए सेवाएं देने वाले चार श्रीकृष्णानुरागियों की दूर दृष्टि और पक्के इरादे की प्रेरक कहानी है हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी। अब से 26 वर्ष पूर्व चार लोगों ने यह कोशिश शुरू की, जो वर्तमान में युवाओं को गीता के सूत्र से संस्कारित करने का महाभियान बन चुकी है। अब से 26 वर्ष पीछे चलें तो इस्कॉन के तत्कालीन संगठन से जुड़े चार युवाओं कृष्णप्रताप प्रभु, संजय प्रभु, राघवेंद्र प्रभु और मुकेश प्रभु ने आत्मसंतुष्टि के लिए इस्कॉन से स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करने का निर्णय किया। चार लोगों से शुरू हुआ यह सिलसिला 26 वर्षों में चार हजार से अधिक संख्या वाले विस्तृत गीता परिवार के रूप में समृद्ध हो चुका है। यह भी पढ़ें- Varanasi News: स्वतंत्रता भवन में जन्माष्टमी उत्सव का आयोजन कृष्णप्रताप प्रभु बताते ...