जनेऊ पहनना जितना जरूरी, उतना ही जरूरी है इन नियमों का पालन, जानें पूरी जानकारी
नई दिल्ली, जुलाई 4 -- जनेऊ, जिसे यज्ञोपवीत भी कहा जाता है, हिंदू संस्कृति का एक पवित्र धागा है। इसे उपनयन संस्कार के दौरान बाएं कंधे से दाईं भुजा तक पहना जाता है। यह केवल एक धागा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संकल्प, कर्तव्य और शुद्धता का प्रतीक है। जनेऊ धारण करने वाला व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन, ज्ञान और नैतिकता का पालन करने का संकल्प लेता है। आज भी परंपरागत परिवारों में जनेऊ को बहुत महत्व दिया जाता है।जनेऊ का प्रतीकात्मक अर्थ जनेऊ तीन सूत्रों से बना होता है, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। यह देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण का भी प्रतीक है। तीन धागे सत्व, रज और तम गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही यह गायत्री मंत्र के तीन चरणों को भी दर्शाता है। जनेऊ पहनने वाला व्यक्ति इन तीनों ऋणों को चुकाने और जीवन को सात्विक बनाने का संकल्प...
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