मुजफ्फरपुर, जनवरी 4 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। सफदर हाशमी नुक्कड़ नाटक के प्रणेता थे। उन्हें याद करते हुए आज यह आवश्यक है कि हम नुक्कड़ नाटक के वास्तविक अर्थ को समझें। जनता के बीच जाकर जनसमस्याओं पर आधारित नाटकों की प्रस्तुति दें, ताकि मनोरंजन के साथ-साथ जनवादी आंदोलन का बीज विशाल वृक्ष का रूप ले सकें। ये बातें रविवार को सफदर हाशमी के शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नाट्य निर्देशक स्वाधीन दास ने कही। मालीघाट स्थित मोर्चा कार्यालय में बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा 'विकल्प' के बैनर तले यह आयोजन किया गया। प्रो. कृष्णनंदन सिंह ने कहा कि सफदर हाशमी द्वारा लिखित नाटकों से पूंजीवाद की जड़ें हिल जाती थीं। दिवाकर घोष ने कहा कि किस प्रकार सत्ता का रंगकर्म जनता के आदर्शों और मूल्यों को नष्ट करने में लगा हुआ है तथा क्यों आज जनता के रं...