लखनऊ, नवम्बर 22 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता थिएटर आर्ट्स वर्कशॉप की ओर से पद्मश्री स्वर्गीय प्रो.राज बिसारिया की 91वीं जयंती पर नाटक शुतुरमुर्ग का मंचन किया गया। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में 1968 में ज्ञानदेव अग्निहोत्री के लिखे नाटक को प्रफुल्ल त्रिपाठी के निर्देशन में पेश किया गया। ये नाटक दर्शकों को उनकी नींद से जगाता तो है ही साथ ही उनके जेहन में कई सवाल भी छोड़ जाता है। 45 दिन की प्रस्तुतिपरक कार्यशाला के समापन पर मंचित हुई कहानी में दर्शाया गया कि सत्ता अंधी होती है, सत्ता जनता की बदौलत तो होती है मगर उसकी हितैषी नहीं होती, क्योंकि जनता को शुतुरमुर्ग बने रहना पसंद है। आम आदमी अपने बनाये सुरक्षा घेरे से बाहर निकलना ही नहीं चाहता या बाहर निकलने का साहस नहीं कर पाता और इसी का पूरा लाभ हर सत्ता उठाती है। जनता को कुछ ऐसे ही जागरूक नाटक...
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