महाराजगंज, फरवरी 25 -- महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। जनगणना में ब्रिटिश काल के दौरान कागज व स्याही से शुरू हुआ यह सफर अब 2026 की डिजिटल स्क्रीन तक पहुंच गया है। इस बार की जनगणना तकनीक के लिहाज से खास होगी। लगभग नौ दशकों के लंबे अंतराल के बाद इस बार की जनगणना के दूसरे चरण में देश की सभी जातियों की गिनती की जाएगी। वर्ष 1872 में हुई जनगणना की सीमित पहुंच के मुकाबले 2026 की जनगणना में सवालों का दायरा भी बढ़ा है। इसमें शिक्षा, आवास व अब जाति जैसे प्रमुख कॉलम शामिल होंगे। आजादी के बाद से अब तक की जनगणना में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के आंकड़े ही अलग से जुटाए जाते थे। अन्य पिछड़ी जातियों व सामान्य वर्ग की जातियों की सटीक संख्या को लेकर केवल अनुमान ही लगाए जाते थे। आखिरी बार जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी। अब 90 साल बाद सरकार ने सभी...