अलीगढ़, जून 22 -- अकराबाद, संवाददाता। गांव लधौआ स्थित चीनी मिल परिसर में अखंड आर्यावर्त फाउंडेशन, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा एवं 108 कुंडीय महायज्ञ के आठवें दिन रविवार को कथा व्यास जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने श्रीराम, माता सीता, जटayu और हनुमान संयोग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा, त्याग और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता आत्मतत्व हैं। उन्हें अग्नि जला नहीं सकती, वायु सुखा नहीं सकती और जल गीला नहीं कर सकता। श्रीराम स्वयं अग्निस्वरूप हैं, इसलिए उनका स्वरूप सनातन, अविनाशी और शाश्वत है। भगवान श्रीराम का प्रत्येक कार्य धर्म की स्थापना, सज्जनों की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए था। वनगमन का प्रमुख उद्देश्य ऋषि-मुनियों, ब्राह्मणों, साधु-संतों और तपस्वियों को राक...