नई दिल्ली, सितम्बर 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि अदालती कार्यवाही को बिना अनुमति के सोशल मीडिया पर अपलोड/प्रसारित करना ‌अदालत की अवमानना ​​है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी वीडियो क्लिप्स को प्रसारित करना जिनमें गलत बातें जोड़ी गई हों या जजों की टिप्पणियों को गलत संदर्भ में दिखाया गया हो आपराधिक कृत्य है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी एक वकील की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए की। याचिका में उन्होंने सोशल मीडिया मंचों और समाचार पोर्टलों के खिलाफ अदालत में उनकी दलीलों के ऑडियो-वीडियो क्लिप प्रसारित करने का आरोप लगाए थे। देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने हालांकि अधिवक्ता को अदालती कार्यवाही से संबंधित उसकी वीडियो क्लिप हटाने के लिए सोशल मीडिया प...