हापुड़, अगस्त 15 -- चलो फिर आज वह नजारा याद कर लें, शहीदों के दिल में थी वो ज्वाला याद कर लें। जिसमें बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पे, देशभक्तों के खून की वो धारा याद कर लें। स्वतंत्रता दिवस का सूर्योदय कई वयोवृद्धों को प्रथम स्वतंत्रता दिवस की वह स्मृतियां ताजा करा देता है। आजादी की पहली किरण अब तक उनके जेहन में जवान है। क्षेत्र के कई बुजुर्गों की ऐसी ही कहानियां हैं। सिंभावली के गांव बक्सर निवासी किसान जगदीश चंद बताते है कि आखिर कैसी थी आजाद भारत की पहली सुबह। करीब 94 वर्ष की आयु पार कर चुके गांव बक्सर निवासी जगदीश चंद ने बताया कि उनकी आयु करीब 14 वर्ष के आस पास होगी, तब 15 अगस्त 1947 की सुबह ही आजादी का समाचार मिला। यह भी पढ़ें- 15 अगस्त की सुबह हर ओर था देश की आजादी का उल्लास हमने एक नई सुबह आजादी की सांस ली, लेकिन साथ में गुलामी के जख...