बाराबंकी, मार्च 8 -- हैदरगढ़। भगवती सीता जगत जननी हैं। सृष्टि का आधार हैं। संसार का उद्भव, पालन और संहार उन्हीं के द्वारा होता है। ये विचार बहुताधाम में चल रहे मानस सम्मेलन के सातवें दिन कथा व्यास डॉ कृष्ण कुमार मिश्र ने व्यक्त किए। उन्होंने शक्तितत्व की विवेचना करते हुए कहा कि जगत के संचालन और नियमन की जो अदृश्य शक्ति है। वही सीता के रूप में अवतरित होती है।सीता जी एक नारी के रूप में संसार को आदर्श पत्नी, गृहिणी एवं माता के कर्तव्य का बोध कराती हैं। वे समाज को भारतीय नारी शक्ति के महत्व तथा उसके व्यापक गौरव की याद दिलाकर नारी-सम्मान की प्रेरणा देती हैं। अयोध्या के कौशल्या घाट के महन्त सुकृपा दास ने कहा कि मानस में वर्णित श्री रामजी सर्वगुणसम्पन्न पुरुषोत्तम हैं। उन्होंने मानव मात्र को चरित्र की शिक्षा देने के लिए ही मनुष्य रूप में जन्म लिय...
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