जगत कल्याण के लिए शिव ने पिया था हलाहल
लखीमपुरखीरी, मई 12 -- राम बाटिका धाम में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन वृंदावन से आए कथा व्यास संतोष गिरी महाराज ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। शिव कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा व्यास ने समुद्र मंथन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला तो उसके प्रभाव से संपूर्ण सृष्टि संकट में पड़ गई। जगत के कल्याण के लिए भगवान शिव ने विष का पान कर लिया। इससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव त्याग, करुणा और लोककल्याण के प्रतीक हैं। यह भी पढ़ें- माता-पिता और गुरु की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म : स्वामी प्रदीप उनकी बहुत ही सरल उपासना है। शिव इतने दयालु हैं कि एक लोटा जल समर्पित करने वाले के सभी कष्ट हर लेते हैं। कथा के दौरान शिव भजनों से माहौल भक्तिमय बना रहा। श...
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