मिर्जापुर, अप्रैल 1 -- मिर्जापुर। नव विकसित कॉलोनियों का अनियोजित विस्तार वहां के बाशिंदों से बुनियादी सुविधाओं की दूरी बढ़ रहा है। शहरी सीमा में बस जाने की चाहत में लोगबाग यह भी नहीं देखते कि कॉलोनाइजर ने वहां नागरिक सुविधाओं का खाका भी बनाया है या नहीं। बाद में वे समस्याओं से घिरे समाधान की गुहार लगाते हैं। यह हाल जंगली घोषी कॉलोनी का भी है। जर्जर सड़क रोज जख्म देती है। जाम सीवर लाइन, गंदगी और बिजली के अव्यवस्थित एवं ढीले तार मानों उस जख्म पर नमक छिड़कते हैं। दिनचर्या प्रभावित हो चली है। शिकायत पर जिम्मेदार अफसर ध्यान ही नहीं देते। पुनगर के घुरहूपट्टी में वन विभाग के कार्यालय से चंद कदम की दूर बसी जंगली घोषी कॉलोनी में विकास के दावों और जमीनी हकीकत में बहुत अंतर है। लगभग एक दशक पूर्व बनी कॉलोनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।...
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