नई दिल्ली, अप्रैल 2 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से यह बताने के लिए कहा कि 'क्या प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनावश जख्मी होने के बाद दिव्यांगता के कारण बाहर किए गए सैन्य प्रशिक्षुओं को सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए पूर्व सैनिक माना जा सकता है। जस्टिस बीवी नागरात्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से निर्देश प्राप्त करने को कहा है। पीठ ने ऐसे कैडेट्स को होने वाली कठिनाइयों से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रही वरिष्ठ वकील रेखा पल्ली ने पीठ को बताया कि ऐसे लगभग 80 से 90 फीसदी कैडेट्स का पुनर्वास किया जा सकता है, लेकिन उन्हें रोजग...
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