नई दिल्ली, जुलाई 24 -- रमेश त्रिपाठी, नई दिल्ली दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के गुनहगारों तक पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस अब गूगल की भी मदद लेगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के आधार पर शक की सुई सुनियोजित डिजिटल दस्तावेज कहे जाने वाले 'टूलकिट' और 'विदेशी फंडिंग' के बड़े नेटवर्क पर टिक गई है। तकनीकी साक्ष्यों और शुरुआती जांच के बाद पुलिस को शक है कि जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र और प्रदर्शनकारी तो केवल मोहरे थे। असली मास्टरमाइंड तो सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिये पर्दे के पीछे से पूरी साजिश को रचने वाले कुछ बाहरी असामाजिक तत्व थे। इन लोगों ने ही प्रदर्शन को हिंसक बनाने और भीड़ को जुटाने की रूपरेखा तैयार की थी। यह भी पढ़ें- पाकिस्तान-बेस्ड 480 हैंडल ब्लॉक, फेक न्यूज के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई जांच एजेंसियों की तकनी...