कटिहार, अप्रैल 14 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि मध्य-पूर्व में संघर्षविराम की घोषणा के बाद जहां वैश्विक स्तर पर राहत की उम्मीद जगी है, वहीं इसका असर कटिहार के लघु उद्योगों पर अभी सीमित ही दिख रहा है। युद्ध की आंच में झुलसे स्थानीय उद्योग अब भी महंगे कच्चे माल और अस्थिर सप्लाई व्यवस्था के कारण पूरी तरह संभल नहीं पाए हैं। खासकर प्लास्टिक आधारित इकाइयों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।युद्ध के दौरान कच्चे माल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने उत्पादन व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। प्लास्टिक दाना, जो पहले 80-90 रुपये प्रति किलो के आसपास उपलब्ध था, वह बढ़कर 170 रुपये तक पहुंच गया। यह भी पढ़ें- मध्य-पूर्व तनाव का असर: कटिहार में महंगी हुई बिजली वायरिंग, बढ़ा घर बनाने का खर्च इस अप्रत्याशित उछाल ने छोटे और मझोले उद्योगों की लागत को असंतुलित कर...
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