बरेली, मार्च 14 -- रमजान के महीने में इस बार इफ्तार का दस्तरख्वॉन पहले जैसा नजर नहीं आ रहा है। जंग के कारण बढ़ती महंगाई और गैस बचाने की चिंता ने रोजेदारों की रसोई का मिजाज बदल दिया है। कई घरों में तले-भुने व्यंजनों की जगह अब हल्की और जल्दी तैयार होने वाली चीजें शामिल की जा रही हैं। रोजेदार राजिया, निदा ने बताया कि पहले जहां इफ्तार में तरह-तरह की पकौड़ियां, समोसे और चना-चाट जैसे व्यंजन आम तौर पर दिखाई देते थे, वहीं अब ये चीजें कई घरों से गायब हो गई हैं। गैस की खपत कम करने के लिए लोग तलने-भूनने वाले व्यंजनों से परहेज कर रहे हैं। इसके स्थान पर दस्तरख्वॉन पर अब फलों की अलग-अलग किस्में और बाजार से खरीदी गई तैयार सामग्री ज्यादा नजर आ रही है। खजूर के साथ सेब, केला, पपीता और अन्य मौसमी फलों को इफ्तार में प्राथमिकता दी जा रही है। बिलकिस, निगहत, सन...