जंगलों में सुलगती आग जन सहयोग से ही बुझेगी
नई दिल्ली, अप्रैल 22 -- वीरेंद्र कुमार पैन्यूली,पर्यावरणविद् व सामाजिक कार्यकर्ता जंगल रहेंगे, तो चिनगारी से आग लगने का डर भी रहेगा। इसलिए जंगलों से आते-जाते सावधानी बरतने की हिदायत दी जाती है। साल-दर-साल वनों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इनकी रोकथाम राज्यों का विषय है, इसलिए राज्य सरकारों को अपनी-अपनी कार्ययोजनाएं बनानी होंगी। यह काम इसलिए भी जरूरी है कि वन क्षेत्रों के अतिक्रमण से जंगली जीव इंसानी बस्तियों में धड़ल्ले से घुसने लगी हैं। ऐसे में, अगर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती गईं, उनका दायरा बढ़ता गया, तब तो वन्य जीव और हिंसक आक्रमण करने लगेंगे। फिर इन्हीं दिनों में यहां लाखों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का आना-जाना व ठहरना होता है। तीर्थयात्रा तो बरसात तक जारी रहती है। इस दौरान दावाग्नि से प्रभावित क्षेत्रों में भू-स्ख...
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