हाजीपुर, अप्रैल 14 -- सहदेई बुजुर्ग। सं.सू. सहदेई और देसरी प्रखंड क्षेत्र में 2200 एकड़ में मक्के की खेती होती है। मक्का उत्पादक किसान नीलगायों से सबसे ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं। रकवा घटता जा रहा है। फसल रौंदे जाने और समय पर सिंचाई की सुविधा न मिलने से किसान परेशान हैं। इसके अलावा मौसम का समय-समय पर बदलाव, बाढ़, वर्षा और ओलावृष्टि से क्षति हो रही है। मक्का की फसल 120 से लेकर 170 दिनों में पूरी तरह से तैयार हो जाती है। मक्के की खेती करने वाले किसान कहते हैं कि मक्का की बुवाई के लिए पहले पूरी मिट्टी को समतल किया जाता है, और जब खेतों में नमी बनी रहती है, तब मक्के की बुआई ट्रैक्टर या बैलों की मदद से की जाती है। यह भी पढ़ें- लाभ की खेती मक्का को घोड़पड़ास और जंगली सुअर का खतरा पौधों के अंकुरित होने के बाद सिंचाई और उर्वरक की जरूरत को पूरा कि...