लखीसराय, फरवरी 22 -- चानन, निज संवाददाता। कहते हैं न कि आस्था पर कोई हावी नहीं हो सकता। चाहे वह रेत का टीला हो, जंगल हो या फिर पहाड़। जब पूजा करना है तो भक्त सारी बाधाओं को हंसते -हंसते पार कर जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजरा जंगली देवता गुलाब बाबा के निकट साल में एक बार दिखता है। भलूई पंचायत के सतघरवा कोड़ासी में स्थित गुलाब बाबा की पूजा साल में एक बार सरस्वती पूजा खत्म होने के बाद आने वाले पहली रविवार को होती है। जंगली देवता गुलाब बाबा की आदिवासी समाज के साथ आस पास के लोगों के लिए काफी मायने रखता है, बावजूद पूजा स्थल को बेहतर बनाने का प्रयास किसी के द्वारा नहीं किया गया। यह स्थल काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल सरस्वती पूजा के बाद आने वाले रविवार को श्रद्धालु अपनी मन्नत को लेकर बाबा के पास पहुंचते और मनोवांछित फल की कामना कर वापस लौटते हैं। ...