संभल, नवम्बर 28 -- गंगा एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे के बाद शुक्रवार की शाम बिसारू गांव का आसमान जितना धुंधला था, उससे कहीं ज्यादा धुंधली थी गांववासियों की आंखें। जिन घरों से कभी बच्चों की हंसी गूंजा करती थी, वहां आज मातम का ऐसा सन्नाटा पसरा कि हवा तक भारी महसूस हो रही थी। पोस्टमार्टम के बाद जब रोहित की पत्नी रेनू, उसकी बेटी रिया, बेटा भास्कर और उसके बड़े भाई सुनील कुमार की पत्नी गीता के शव गांव पहुंचे, तो मानो पूरा गांव एक साथ फट पड़ा-दर्द, चीखें और करुण पुकारों से हवा कांप उठी। इसी बीच घायल रोहित को भी मुरादाबाद अस्पताल से घर लाया गया, ताकि वह अपने बिखर चुके परिवार को अंतिम बार देख सके। स्ट्रेचर पर लेटे रोहित की आंखें खुली थीं, पर उनमें जीवन की चमक खत्म हो चुकी थी। उसे देखकर लगा मानो वह सांसें तो ले रहा है, पर भीतर से टूट चुका है ...
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