अंबेडकर नगर, अप्रैल 17 -- अम्बेडकरनगर, संवाददाता। छात्रों की संख्या में तो लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन उसके अनुरूप तमाम स्कूलों में वाहनों की संख्या जस की तस बनी हुई है। नतीजा यह है कि ज्यादातर स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जा रहा है। इससे उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है। अभिभावक भी समय समय पर स्कूल प्रबंधन से वाहनों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हैं, लेकिन कमाई के चक्कर में स्कूल संचालकों पर कोई असर नहीं दिखता है। मौजूदा समय में जिले में 407 ऐसे स्कूल है, जिनके द्वारा 1265 छोटे बडे़ स्कूली वाहनों का संचालन किया जाता है। पिछले एक दशक में जिले में संचालित निजी स्कूलों में छात्रों की संख्या सरकारी स्कूलों की तुलना में अप्रत्याशित तरीके से तेजी से बढ़ी है। यह भी पढ़ें- प्राइमरी स्कूलों में वाहन नहीं होने का शपथ पत्र देना ...
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