नई दिल्ली, जून 19 -- बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'गंभीर अवसाद और व्यक्तित्व विकार' से जूझ रही मनोविज्ञान की एक छात्रा को राहत देने से इनकार कर दिया। छात्रा को कम उपस्थिति के कारण उसे तृतीय वर्ष की दोबारा परीक्षा देने से रोक दिया था। कोर्ट ने कहा कि वह छात्रा के प्रति सिर्फ सहानुभूति रख सकता है, लेकिन कोई मदद नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति आर. आई. छागला और न्यायमूर्ति फरहान दुबाश की खंडपीठ ने कहा कि वह लड़की की परिस्थितियों के प्रति 'असंवेदनशील' नहीं है और वह उसके तथा उसके परिवार के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त करती है। अदालत ने कहा कि सहानुभूति कानूनी अधिकार का विकल्प नहीं हो सकती। अदालत का संबंध निर्णय-प्रक्रिया की वैधता से होता है, न कि शैक्षणिक नियमों को फिर से लिखने या ऐसे अपवाद बनाने से, जिनकी स्वयं शासकीय ढांचा अनुमति नहीं देता। खंडपीठ ने यह ...