लखनऊ, अप्रैल 12 -- बीएनए स्वर्ण जयंती समारेाह के आखिरी दिन पहला नाटक बी. एम. शाह प्रेक्षागृह में महाकवि भास रचित कालजयी नाटक दूतवाक्यम् का मंचन किया गया। डॉ. दिव्या श्रीवास्तव के निर्देशन में मंचित नाटक भरतनाट्यम और छाऊ शैली के अद्भुत संगम से सुसज्जित था। नाटक की कहानी महाभारत के उस ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण पर केंद्रित थी। जब भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के शांति-दूत बनकर हस्तिनापुर की सभा में कदम रखते हैं। श्रीकृष्ण का मूल संदेश कौरवों को पांडवों के साथ न्याय करने और आसन्न विनाशकारी युद्ध को टालने का था, किंतु अहंकार के वशीभूत दुर्योधन ने इस शांति प्रस्ताव को धता बताते हुए न केवल ठुकरा दिया, बल्कि दूत के रूप में आए श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का दुस्साहस भी किया। इस पूरे घटनाक्रम में धृतराष्ट्र सब कुछ जानते हुए भी पुत्र-मोह और निर्णय लेने की अक्...