सीतामढ़ी, दिसम्बर 4 -- परसौनी। बागमती की पुरानी धारा से घिरे मुशहरी गांव की स्थिति बेहद दयनीय है। 50 वर्षों से पुल की उम्मीद लगाए यहां के दो सौ परिवारों का जीवन छह माह नाव और छह माह चचरी के सहारे रहती है। इस बार स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि बीते दिनों आई बाढ़ में ग्रामीणों द्वारा चंदा जुटाकर बनाया गया चचरी पुल भी बह गया। अब आवागमन केवल एकमात्र सरकारी नाव पर निर्भर है, जिसे गांव के ही युवक चलाते हैं। यह नाव सेवा भी कभी-कभार रुक जाती है, इस कारण पूरे गांव का परिचालन रुक जाता है। नदी की धार को पार करने के लिए मात्र एक नाव होने के कारण भी यहां के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गुरुवार की सुबह नदी पार करने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोग बताते है कि एक नाव है, इसपर एक बार में करीब दस लोग ही पार कर सकते है...
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