कुशीनगर, अक्टूबर 28 -- कुशीनगर। बिहार समेत पूरे पूर्वांचल में लोक आस्था का महापर्व छठ का चारों तरफ धूम है। व्रती महिलाएं पिछले गई पीढ़ियों ने अपनी परपंराओं को जीवंत बनाते चली आ रही हैं। छठ पर्व में पीढियों से डाला देने की परंपरा है। सास मां का स्वास्थ्य साथ नहीं देने पर अपनी बड़ी बहू समेत किसी भी बहू को डाला देती है। उसका आने वाली नई पीढी की महिलाएं निर्वहन करती हैं। सास के माध्यम से छठ माता का डाला को पाना सुहागन महिलाएं अपना सौभाग्य समझती हैं। दो से तीन पीढ़ियों से छठ महापर्व के बारे में पूछा गया तो वह बुजुर्ग होने के बावजूद उनके आंखों में छठ माता के प्रति अपार श्रद्धा जागृत हो गया। बुजुर्ग महिलाएं छठ माता का बखान और उनके आशीर्वाद से परिवार में खुशहाली का बखान करने नहीं थकी। सास मां बहू को डाला देने के दौरान छठ महाव्रत को धारण करने तथा ...
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