रांची, अक्टूबर 27 -- रांची। भारत जैसी प्राचीन संस्कृतियों में त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण तथा संवहन का माध्यम भी होते हैं। छठ पूजा ऐसा ही एक प्रमुख पर्व है जो पूर्वी भारत की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। सूर्य की उपासना का यह पर्व, सामाजिक-धार्मिक परंपराओं की अखंड यात्रा में स्त्रियों की भूमिका का एक अत्यंत शक्तिशाली प्रतीक भी है। जीवनदायिनी किरणों के माध्यम से संसार का पालन करने वाले देवता के रूप में सूर्य की पूजा विश्व की लगभग सभी प्राचीन सभ्यताओं में होती रही है। भारत में भी वैदिक काल से आदित्य (सूर्य) एक महत्वपूर्ण देवता रहे हैं। किंतु कालांतर में लोक परंपरा ने वेद की मान्यताओं को आत्मसात किया और सूर्य देव तथा उनकी बहन छठी मईया के रूप में अपनी आशा-आकांक्षाओं को एक ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.