नोएडा, मार्च 2 -- ग्रेटर नोएडा, कार्यालय संवाददाता। समय के साथ सब कुछ बदल गया है। त्योहारों पर भी इसका असर पड़ा है। बाजारीकरण हावी हो गया है। रंगों के पर्व होली पर चौपालों पर एक माह पहले से ही फाग और रसिया की गूंज रहती थी। पुरुष और महिलाएं टोली बनाकर निकलते और गीत गाते थे। ढोल और नगाड़ों से त्योहार की शुरुआत होती थी। पुराने समय में होली केवल एक दिन का हुड़दंग नहीं, बल्कि एक महीने तक चलने वाला एक सामाजिक और सांस्कृतिक त्योहार था। इसकी तैयारी वसंत पंचमी के आगमन के साथ ही शुरू हो जाती थी। बोड़ाकी गांव के रहने वाले 82 वर्षीय बुजुर्ग मास्टर परशुराम बताते हैं कि फाल्गुन मास की शुरुआत के साथ ही गांवों में उल्लास का माहौल बन जाता था। शाम ढलते ही चौपालों पर ढोलक, मंजीरे और झांझ की थाप पर फाग और रसिया गूंजते थे। इसे सुनने के लिए बच्चे से लेकर बुजुर...
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