गोरखपुर, सितम्बर 23 -- पं. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि पितरों का श्राद्ध करने वाला गृहस्थ, दीर्घायु, पुत्र पौत्रादि से युक्त, यश, स्वर्ग, पुष्टि, बल, लक्ष्मी , पशु, सुख साधन तथा धन-धन यदि की प्राप्ति करता है। उन्होंने बताया कि पुत्र के अभाव में विधवा भी पति का श्राद्ध कर सकती है। यदि कोई न हो तो सगोत्र का व्यक्ति भी कर सकता है। हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पितृपक्ष इस वर्ष 27 सितंबर से प्रारंभ होकर 10 अक्तूबर (पितृ विसर्जन) तक रहने वाला है।कितने दिन के हैं इस पर श्राद्ध हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष 14 दिनों का है, लेकिन श्राद्ध कार्य 16 दिन किए जाएंगे। दरअसल, अनुकूल समय (कुतप बेला) में श्राद्ध किया जाता है, लेकिन श्राद्ध एक दिन पूर्व पूर्णिमा से ही आरंभ हो जाता है। आश्विन कृष...