चौदहवीं का चांद हो...गाने में एक शब्द की वजह से शकील बदायूंनी ने भरी महफिल में झेली थी जिल्लत
नई दिल्ली, मई 18 -- शकील बदायूंनी, एक ऐसे गीतकार जिन्होंने प्यार पर कुछ ऐसे नगमे लिख दिए जिनको तारीफ में बांधना मुश्किल है। मोहब्बत जो सिर्फ दिल तक थी उन्होंने इसे ऐसे अल्फाज दिए जिनसे कई लोगों का काम आसान हो गया। जब चली ठंडी हवा, जब प्यार किया तो डरना क्या, मुझे इश्क है तुझी से... कई ऐसे गाने हैं जो कानों से सीधे दिल में उतर जाते हैं। चौदहवीं का चांद हो, एक ऐसा ही खूबसूरत गाना है जो महबूबा की तारीफ में लिखा गया है। लोग आज भी इसको सुनते और गाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गाने की वजह से सखील बदायूंनी को भरी महफिल में लताड़ पड़ी थी। चलिए आज आपको ये किस्सा बताते हैं।लिखे थे दिल छूने वाले भजन शकील बदायूंनी का जन्म 1916 में उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। उन्होंने अपने नाम के आगे शहर का नाम जोड़ा था। उनका असली नाम शकील अहमद था। कहा ज...
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