बेगुसराय, मार्च 22 -- बीहट, निज संवाददाता। वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन रविवार को माता दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की अराधना की गई। सिद्धाश्रम के स्वामी चिदात्मन जी ने कहा कि माता कूष्मांडा जिन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, ने ही अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए माता कूष्मांडा को सृजन की देवी भी कहा जाता है। माता कूष्मांडा सृष्टि की आदि स्वरूपा हैं। पीत वस्त्र पहनकर तथा पीले फूल तथा मालपुआ तथा पेठा माता को भोग लगाकर लोगों के बीच वितरण किया गया। बीहट के शीतला मंदिर के महंत श्रीमहेश दास जी महाराज ने कहा कि माता कूष्मांडा की अराधना से सभी प्रकार के ताप (दैहिक, दैविक व भौतिक)नष्ट होते हैं और घर में सुख समृद्धि आती है। माता कूष्मांडा आरोग्यता प्रदान करने के साथ साथ शोक व दरिद्रता का भी नाश करती है। यों तों बीहट नगर परिषद मे...
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