नई दिल्ली, मार्च 24 -- पौराणिक मान्यता है कि मनुष्य को 'यमुना के पान और गंगा में स्नान' से पुण्य मिलता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को देवी यमुना पृथ्वी पर प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन को यमुना जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग यमुना में स्नान करके दीपदान करते हैं। सूर्य पुत्री और यमराज की बहन यमुना का उद्गम स्थल कालिंद पर्वत है, इसलिए इन्हें कालिंदी भी कहते हैं। भागवत पुराण में वर्णन है कि भगवान कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक यमुना भी हैं। यमुना का वैदिक नाम यमी है। ऋग्वेद के संवाद सूक्त में यम-यमी संवाद का उल्लेख मिलता है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यमुना ने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनके कठोर तप से प्रसन्न हाेकर श्रीहरि ने उन्हें वरदान देते हुए कहा कि वे जब द्वापर युग में पृथ्वी पर कृ...