गढ़वा, मार्च 5 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। भारतीय लोकसंस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण रही है। यहां ऋतुओं, पर्वों और मासों के साथ अनेक सांस्कृतिक परम्पराएं विकसित हुई हैं। इन्हीं लोक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण परंपरा है चैत्र मास में गाया जाने वाला चैता। चैता गायन की परम्परा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है और यह मुख्यतः उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित रही है। पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच के निदेशक नीरज श्रीधर स्वर्गीय यह बताते हैं। उन्होंने बताया कि बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में चैता लोकगायन आज भी लोकजीवन का अभिन्न अंग बना हुआ है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास वर्ष का पहला महीना माना जाता है। यह बसंत ऋतु के अंतिम चरण का समय होता है, जब प्रकृति अपने सौंदर्य के चरम पर होती है। खेतों में फसलें पककर तैयार...
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