लखनऊ, मई 7 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में लगभग 50 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इन मीटरों के समानांतर उपभोक्ताओं के पुराने मीटरों को "चेक मीटर" के रूप में छोड़े जाने का दावा पावर कॉरपोरेशन द्वारा लगातार किया जाता रहा है, लेकिन भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार पांच प्रतिशत चेक मीटरों की मिलान रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। उपभोक्ता परिषद लगातार चेक मीटरों की वास्तविक मिलान रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि समय-समय पर किसी एक-दो डिवीजन में कुछ उपभोक्ताओं के मामलों को सोशल मीडिया के माध्यम से यह कहकर प्रचारित किया गया कि चेक मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग सही चल रही है लेकिन इस प्रकार के सीमित उदाहरण पूरे प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं की...