नई दिल्ली, सितम्बर 29 -- दुनिया के तमाम छोटे-बड़े लोकतंत्र भारतीय निर्वाचन आयोग को एक नजीर के रूप में देखते रहे हैं। इसकी पारदर्शिता और मतदाताओं व राजनीतिक दलों में स्वीकार्यता ने हमारे लोकतंत्र को दुनिया भर में प्रतिष्ठा दिलाई है। ऐसे में, उसकी कार्यशैली पर इतने गंभीर सवालों का खड़ा होना वाकई अफसोसनाक है। एक राष्ट्रीय दैनिक की खबर के बाद मौजूदा आयोग की कारकर्दगी को लेकर देश भर में संशय का जो माहौल बना है, उसे शनिवार को आयोग द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और उसके द्वारा उठाए गए नए कदमों से शांत हो जाना चाहिए था, मगर मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस चोकलिंगम का एक पत्र सामने आया, जिसने ताजा विवाद को नया आयाम दे दिया। चोकलिंगम ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे अपने पत्र में मांग की कि स्थानीय निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को अधिक...