नई दिल्ली, अप्रैल 19 -- विश्व विरासत दिवस पर आमतौर पर संरक्षण की चर्चा भव्य स्मारकों, प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। लेकिन विरासत हमेशा पत्थरों में ढली या स्थायी नहीं होती। कई बार यह नाजुक, क्षणभंगुर और अनुभव करने योग्य होती है। इसी विचार को एक अनोखे अंदाज में जीवंत करती हैं प्राची धबल देब, जो चीनी को यादों और कहानियों का माध्यम बनाकर ऐसी कलाकृतियाँ रचती हैं, जो जितनी सुंदर हैं, उतनी ही क्षणिक भी होती हैं।क्यों कहा जाता है क्वीन ऑफ रॉयल आइसिंग एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित सांस्कृतिक कलाकार के रूप में, प्राची को भारत की 'क्वीन ऑफ रॉयल आइसिंग' कहा जाता है। यह उपाधि उनकी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ उनके विशिष्ट कलात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाती है। रॉयल आइसिंग एक बेहद सटीक और धैर्...
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