बलिया, मई 11 -- भरौली, हिन्दुस्तान संवाद। पौराणिक महाराज ने चित्र और चरित्र के अंतर को स्पष्ट करते हुए प्रवचन में श्रोताओं को बताया कि जहां चित्र और चरित्र का भेद होता है वहां रावण प्रवृत्ति उत्पन्न होती है और जहां दोनों में एकता होती है वहां रामत्व प्रकट होता है।कोरंटाडीह (उजियार)स्थित हथियाराम मठ के परिसर में चल रहे हरिहरात्मक महायज्ञ में शनिवार की शाम प्रवचन में महाराज रामचरितमानस के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग भक्तों को समझाते हुए रामकथा को विश्वास से विश्राम तक की यात्रा बताया। उन्होंने जीवन के गूढ़ सत्य को सहज रुप में समझाते हुए कहा कि मनुष्य की इच्छाएं प्रायः भ्रम और संशय से भरी होती हैं। यह भी पढ़ें- शिव विवाह सनातनी संस्कृति का दिव्य संदेश रामचरितमानस का मूल उद्देश्य मन में श्रीराम के आदर्श चरित्र का विकास करना है। ...
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