बुलंदशहर, जून 24 -- विश्व के प्राचीन शल्य संस्थानों में शामिल रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन ऑफ एडिनबर्ग में 'फादर ऑफ सर्जरी' महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा स्थापित किए जाने पर नगर के चिकित्सकों ने इसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया। बुधवार को नगर के एक होटल में चिकित्सकों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें महर्षि सुश्रुत के योगदान पर चर्चा की गई।

महर्षि सुश्रुत का योगदान बैठक में डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा का विदेश में स्थापित होना भारतीय चिकित्सा पद्धति और उनके वैश्विक योगदान का अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि सर्जरी के क्षेत्र में सुश्रुत संहिता को विश्व का पहला महत्वपूर्ण शल्य ग्रंथ माना जाता है। महर्षि सुश्रुत ने लगभग 2600 वर्ष पहले शल्य चिकित्सा की नींव रखी थी।

सर्जरी में सुश्रुत की विशेषताएँ डॉ. डीसी त...